October 24, 2026

  • Facebook Icon
  • Twitter Icon
  • Youtube Icon
  • Instagram Icon

कॉकरोच जनता पार्टी का उत्थान और पतन

विरोध प्रदर्शनों, गिरफ्तारियों और राजनीतिक दबाव ने कैसे इस आंदोलन को कमजोर किया।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भारत के राजनीतिक आकाश में एक धूमकेतु की तरह उभरी। कुछ समय तक उसने भारतीय राजनीति के आकाश को अपनी चमक से रोशन किया, लेकिन मेरी राय में, वह जल्द ही उस धूमकेतु की तरह हमेशा के लिए ओझल हो जाएगी—या फिर उस बुलबुले की तरह फूट जाएगी, जिसका अस्तित्व क्षणिक होता है।

कॉकरोच जनता पार्टी का जन्म 16 मई, 2026 को हुआ। इसकी वजह 15 मई को भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति सूर्यकांत द्वारा की गई एक निरर्थक टिप्पणी थी, जिसमें उन्होंने बेरोजगार भारतीय युवाओं की तुलना कॉकरोचों से की थी।

बाद में उन्होंने अपनी टिप्पणी को स्पष्ट करने और उसके प्रभाव को कम करने की कोशिश की, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।

Gyanesh Cockroachबोस्टन विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले अभिजीत दीपके ने मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी सुनने के अगले ही दिन व्यंग्य के तौर पर कॉकरोच जनता पार्टी का गठन कर दिया। लेकिन कुछ ही दिनों के भीतर सोशल मीडिया पर उनके 2 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हो गए।

ऐसा लगता है कि इतनी बड़ी लोकप्रियता उनके सिर चढ़ गई और उनके मन में राजनीतिक महत्वाकांक्षाएँ पैदा होने लगीं। कुछ ही समय बाद वह भारत लौट आए और दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े-बड़े विरोध प्रदर्शनों का आयोजन करने लगे। जंतर-मंतर दिल्ली का वह स्थान है जहाँ अक्सर धरने और प्रदर्शन होते हैं, ठीक वैसे ही जैसे लंदन में हाइड पार्क में होते हैं।

इन प्रदर्शनों का उद्देश्य भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगना था। इसकी वजह परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएँ थीं।

जब उनकी यह माँग मान ली गई, तो लगता है कि उनका हौसला और बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने और कॉकरोच जनता पार्टी ने भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग शुरू कर दी। उन पर आरोप था कि मतदाता सूचियों से लाखों मतदाताओं के नाम कथित रूप से हटा दिए गए थे।

चूँकि कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर, विशेषकर युवाओं के बीच, लाखों समर्थक जुटा लिए थे, इसलिए कुछ लोगों को लगा कि वह जल्द ही आम आदमी पार्टी की तरह एक औपचारिक राजनीतिक दल बन जाएगी। आम आदमी पार्टी ने चुनाव लड़ा था और 2013 में दिल्ली की सत्ता तक पहुँच गई थी।

मैंने पहले भी एक लेख लिखा था, जिसमें मैंने कॉकरोच जनता पार्टी को एक मजाक और दिखावा बताया था।

उस लेख में मैंने समझाया था कि कॉकरोच जनता पार्टी का जन्म और उसका तेजी से उभरना भारतीय युवाओं के एक बड़े वर्ग में व्याप्त गहरी हताशा का परिणाम है। ये वे युवा हैं जो बेरोजगार हैं या जिन्हें अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद बेरोजगारी का भयावह खतरा अपने सामने दिखाई देता है।

लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी ने जो माँग उठाई थी—अर्थात शिक्षा मंत्री का इस्तीफा—उसका भारत की विकराल बेरोजगारी की समस्या को हल करने से कोई संबंध नहीं था।

यदि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दे भी देते, तो उनकी जगह कोई दूसरा व्यक्ति ले लेता। लेकिन इससे बेरोजगारी की समस्या कैसे हल हो जाती?

जब सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग स्वीकार कर ली, तब कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन समाप्त हो जाना चाहिए था।

लेकिन उसे नया जीवन तब मिला, जब समाचारपत्र द इंडियन एक्सप्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा कथित रूप से की गई अनियमितताओं का खुलासा किया। इन अनियमितताओं के कारण लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटाए जाने का आरोप सामने आया।

Jantar Mantar Protestorsइसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग शुरू कर दी और 10 अक्टूबर को दिल्ली में एक विशाल विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की।

इसके जवाब में दिल्ली के अधिकारियों ने राष्ट्रीय राजधानी के बड़े हिस्से में बंद जैसी स्थिति पैदा कर दी। इससे दिल्ली में रहने वाले अनेक लोग कॉकरोच जनता पार्टी के प्रति नाराज हो गए, क्योंकि उन्हें लगा कि पार्टी के आंदोलन से उनके दैनिक जीवन और कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

इसके बाद सरकार ने तय किया कि अब बहुत हो चुका है और कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ सख्ती करने का समय आ गया है।

दिल्ली के केंद्र में स्थित जंतर-मंतर के आसपास पुलिस ने बैरिकेड लगा दिए। संसद, कई महत्वपूर्ण सरकारी इमारतें और एक प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र कनॉट प्लेस भी इसके नजदीक हैं। इसके साथ ही जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटा दिया गया।

कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं के साथ-साथ उसके अनेक सदस्यों और समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया गया। उनमें से कुछ को कई दिनों तक जेल में रखा गया। इससे निश्चित ही पार्टी के समर्थकों के मन में भय पैदा हुआ होगा। अब तो ऐसा लगता है कि उनमें से अधिकांश लोग आंदोलन से गायब ही हो गए हैं।

भारतीय कानून की धारा 163 लागू कर दी गई। इसका प्रभाव उन सार्वजनिक स्थानों, पार्कों और अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ा जहाँ कॉकरोच जनता पार्टी विरोध प्रदर्शन कर सकती थी। ऐसी परिस्थितियों में पाँच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

इस कदम ने कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के मूल आधार पर ही प्रहार किया। आखिर जब उसके सदस्य और समर्थक एक जगह इकट्ठा ही नहीं हो सकते थे, तो वह आंदोलन कैसे चला सकती थी?

Saurabh Das, Abhijt Dipke And Ashutosh Rankaदिल्ली उच्च न्यायालय ने कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका को भी कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने अपनी रिहाई के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने टिप्पणी की कि वे जेन-ज़ी पीढ़ी के नहीं हैं, उन्होंने अपने माता-पिता के नाम और पते का खुलासा नहीं किया था तथा पहले शांति बनाए रखने के लिए जो बंधपत्र दिए थे, उनका उल्लंघन किया था।

कॉकरोच जनता पार्टी के ताबूत में आखिरी कील तब ठुकी, जब गिरफ्तार किए गए उसके नेताओं को केवल इस शर्त पर रिहा किया गया कि वे सार्वजनिक शांति भंग नहीं करने का बंधपत्र देंगे।

ऐसे बंधपत्र देने का अर्थ यह था कि उनके हाथ-पाँव बाँध दिए गए थे और वे प्रभावहीन हो गए थे। उनके द्वारा आयोजित किसी भी विरोध प्रदर्शन को पुलिस शांति भंग करने की कार्रवाई मान सकती थी और उन्हें दोबारा जेल में डाल सकती थी—इस बार शायद और लंबी अवधि के लिए।

इस तरह के बंधपत्र देना उन माफीनामों जैसा भी था, जो भारत पर ब्रिटिश शासन के दौरान गिरफ्तार किए गए अनेक लोगों ने अधिकारियों के सामने प्रस्तुत किए थे। ऐसी कार्रवाइयों से उन लोगों की सार्वजनिक छवि पर दाग लग जाता था और समाज में उन्हें अंग्रेजों के सहयोगी या कमजोर व्यक्ति के रूप में देखा जाने लगता था।

मैंने अपने लेख में पहले ही भविष्यवाणी की थी कि कॉकरोच जनता पार्टी का जल्द ही अंत हो जाएगा।

मेरी राय में, कॉकरोच जनता पार्टी के राजनीतिक सफर का अंत अब निकट है। Punjab Today Logo
________________
यह भी पढ़ें:

जंतर-मंतर का आंदोलन: क्या यह केवल जेन ज़ी का गुस्सा है?

Disclaimer : PunjabTodayNews.com and other platforms of the Punjab Today group strive to include views and opinions from across the entire spectrum, but by no means do we agree with everything we publish. Our efforts and editorial choices consistently underscore our authors’ right to the freedom of speech. However, it should be clear to all readers that individual authors are responsible for the information, ideas or opinions in their articles, and very often, these do not reflect the views of PunjabTodayNews.com or other platforms of the group. Punjab Today does not assume any responsibility or liability for the views of authors whose work appears here.

Punjab Today believes in serious, engaging, narrative journalism at a time when mainstream media houses seem to have given up on long-form writing and news television has blurred or altogether erased the lines between news and slapstick entertainment. We at Punjab Today believe that readers such as yourself appreciate cerebral journalism, and would like you to hold us against the best international industry standards. Brickbats are welcome even more than bouquets, though an occasional pat on the back is always encouraging. Good journalism can be a lifeline in these uncertain times worldwide. You can support us in myriad ways. To begin with, by spreading word about us and forwarding this reportage. Stay engaged.

— Team PT

Punjab Today Logo (hindi)