March 18, 2026

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यदि भगत सिंह भारत के पहले प्रधानमंत्री होते तो देश का नक्शा कुछ और होता – भगवंत सिंह मान

धूरी: पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान ने आज कहा कि यदि शहीद-ए-आज़म भगत सिंह देश के पहले प्रधानमंत्री होते, तो आज देश का नक्शा बिल्कुल अलग होता। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि आज़ादी के दशकों बाद भी देश पुराने सिस्टम के जाल में क्यों उलझा हुआ है, जबकि इसी सिस्टम से मुक्ति के लिए भगत सिंह और करतार सिंह सराभा जैसे क्रांतिकारियों ने अपनी जान न्योछावर की थी।

उन्होंने कहा कि यह दीवार पर लिखी बात पढ़ लेनी चाहिए कि वर्ष 2027 में भी आम आदमी पार्टी ही सत्ता में आएगी, क्योंकि चार वर्षों में सभी गारंटियां पूरी कर दी गई हैं और विरोधियों के पास जनता के सामने जाने के लिए कोई मुद्दा नहीं बचा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विरोधी पार्टियां बारी-बारी से पंजाब को लूटने के बाद अब फिर सत्ता में आने के लिए आपस में लड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान शहीद हुए 750 किसानों को पंजाब अभी तक नहीं भूला है।

आज नए बने सब-डिवीजनल अस्पताल को समर्पित करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह दीवार पर लिखी बात पढ़ लेनी चाहिए कि जनहित में लिए गए फैसलों के कारण ‘आप’ राज्य में दोबारा सरकार बनाएगी।” उन्होंने आगे कहा, “पंजाब के लोग 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद ‘आप’ की सरकार बनाने के लिए उत्साहित हैं। वर्ष 2022 में शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के पैतृक गांव से सत्ता संभालने के बाद हमारी सरकार ने कई जनहितकारी फैसले लिए। हमने चार वर्षों में अपने सभी वादे पहले ही पूरे कर लिए हैं और आने वाले एक वर्ष में हम राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।”

शासन व्यवस्था में नई पहल का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमने चार साल में सभी वादे पूरे कर राजनीति में एक नई परंपरा शुरू की है, जबकि अन्य पार्टियां पांच साल में भी ऐसा करने में सक्षम नहीं हैं। पहले दिन से ही हमारी सरकार पिछली सरकारों के खराब सिस्टम को सुधार रही है और हम आम आदमी की भलाई के लिए साहसिक फैसले लेने से नहीं हिचकते।” उन्होंने आगे कहा, “अब कांग्रेस और बादल फिर से राज्य को लूटने का एक और मौका तलाश रहे हैं, जबकि राज्य पहले ही इनके शासनकाल में बहुत कुछ झेल चुका है।”

लोगों की भावनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “राज्य के समझदार लोग इन्हें कभी भी एक और मौका नहीं देंगे और चुनावों के बाद इन्हें राजनीतिक गुमनामी में भेज दिया जाएगा।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा, “जिन नेताओं ने नशे के कारोबार को संरक्षण दिया था, उन्हें सलाखों के पीछे भेजा गया है। इन नेताओं ने न केवल राज्य में नशे के व्यापार को बढ़ावा दिया, बल्कि अपनी सरकारी गाड़ियों में नशे बेचे और सप्लाई भी किए। पहले किसी ने भी इन प्रभावशाली नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं की थी, लेकिन हमारी सरकार ने ऐसा किया और अब वे अपने कर्मों की सजा भुगत रहे हैं।”

इन नेताओं की आपसी मिलीभगत का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इन राजनीतिक पार्टियों के बीच एक नापाक गठजोड़ बना हुआ था क्योंकि वे राज्य का खजाना लूटने के लिए एक-दूसरे से हाथ मिला लेते थे। जब ये सत्ता में होते थे तो एक-दूसरे के अपराधों को छुपाने के लिए जानबूझकर आंखें मूंद लेते थे और बचाव कर लेते थे। हालांकि, ‘आप’ सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि इस घिनौने अपराध के दोषियों को जेल भेजा जाए।”

विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “आज भी वे एकजुट हैं। चरणजीत सिंह चन्नी, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, सुखजिंदर सिंह रंधावा, कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुखबीर सिंह बादल और अन्य नेता मुझे निशाना बनाने वाले समूह में शामिल हैं। पहले ये नेता मुझे एक मनोरंजन करने वाला बताकर मेरा मजाक उड़ाते थे, लेकिन अब डर के मारे दिन-रात मेरा नाम लेते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “2017 में जब ‘आप’ को कई सीटें मिलीं और वह विपक्ष बनी, तब उन्होंने कहा था कि कुछ नहीं होगा। 2022 में भी उन्होंने यही कहा, लेकिन हमारी सरकार ने लोगों के हित में कई पहल कीं। अब फिर वे कहते हैं कि 2027 में कुछ नहीं होगा, लेकिन ‘आप’ भारी बहुमत से दोबारा सरकार बनाएगी।”

विपक्ष की खराब कार्यप्रणाली पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पूरे विपक्षी पक्ष ने विधानसभा के अंदर और बाहर जनता का एक भी मुद्दा नहीं उठाया। इससे स्पष्ट होता है कि वे केवल अपने पदों को लेकर चिंतित हैं क्योंकि वे सिर्फ सत्ता के भूखे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “सत्ता हासिल करने के लिए बेताब अकाली दल लोगों को गुमराह करने के लिए सोशल मीडिया पर मेरे बारे में एआई के माध्यम से बनाए गए वीडियो पोस्ट कर रहा है। यह दर्शाता है कि मेरे खिलाफ किसी भी मुद्दे की कमी के कारण वे हताश हैं और निराश होकर सत्ता के लिए बेताबी में हर कोशिश कर रहे हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पारंपरिक राजनीतिक पार्टियां मुझसे जलन रखती हैं क्योंकि वे यह बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं कि एक साधारण परिवार का बेटा राज्य की सत्ता को अच्छे तरीके से चला रहा है। इन पार्टियों ने अपने जन-विरोधी और पंजाब-विरोधी रुख के कारण जनता का विश्वास खो दिया, जिसके चलते उन्हें 2022 में सत्ता से बाहर कर दिया गया।”

उन्होंने कहा कि ये पार्टियां लोगों को गुमराह करने के लिए घटिया हथकंडों का सहारा ले रही हैं। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा, “पहले इन नेताओं का स्वागत फूल-मालाओं से किया जाता था, लेकिन अब वे जहां भी जाते हैं, लोग उन्हें हराकर स्वागत करते हैं। लोगों ने आम घरों के बेटों-बेटियों को चुना है, जो अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं, जबकि ये पारंपरिक पार्टियां सत्ता में रहते हुए पूरी तरह असफल रही हैं।”

पिछली सरकार के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इन नेताओं ने अपने निजी राजनीतिक हितों के लिए राज्य के संसाधनों को अंधाधुंध लूटा। जब पंजाब बेरोजगारी, युवाओं के विदेश जाने की प्रवृत्ति और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से जूझ रहा था, तब ये नेता अवैध तरीकों से पैसा कमाने में लगे हुए थे। उन्होंने जनता और राज्य की कीमत पर महल और व्यापारिक साम्राज्य खड़े किए।” उन्होंने आगे कहा, “इन लोगों ने पंजाब की तरक्की और खुशहाली को पटरी से उतार दिया और पंजाब तथा उसकी युवा पीढ़ियों के लिए समस्याएं खड़ी कर दीं। उनके हाथ इस अपराध से रंगे हुए हैं और इतिहास उन्हें पंजाब की पीठ में छुरा घोंपने के लिए कभी माफ नहीं करेगा।”

उन्होंने आगे कहा, “ये नेता बौखला गए हैं क्योंकि हमने जनता के सामने इनके घटिया चरित्र को उजागर कर दिया है और यह उनकी सत्ता के लिए खतरा बन गया है। वे यह बर्दाश्त नहीं कर पा रहे कि अब आम लोगों को पद मिल रहे हैं।” बादलों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “उन्होंने लोगों को झूठे वादों से बहकाकर कारोबार बर्बाद कर दिए। कहा जाता है कि अगर आप पेड़ पर ‘बादल’ लिख देंगे तो वह पेड़ भी सूख जाएगा।”

शहीद-ए-आज़म भगत सिंह को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को हुआ था और 23 मार्च 1931 को वे मात्र साढ़े 23 वर्ष की आयु में शहीद हो गए थे। उन्होंने देश की आज़ादी और अंग्रेजों को देश से बाहर निकालने के लिए संघर्ष किया। उनका तरीका अलग था क्योंकि वे युवा और जोशीले थे, जबकि जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी जैसे अन्य नेताओं के अपने तरीके थे। लेकिन बाद में हमने उनकी विरासत को साल में एक बार 23 मार्च को केवल श्रद्धांजलि देने तक सीमित कर दिया।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर भगत सिंह जीवित होते या उन्हें आज़ादी के बाद नेतृत्व का अवसर दिया जाता, तो देश की तस्वीर पूरी तरह अलग होती। उन्होंने बहुत कुछ लिखा था। उनके जेल के पत्र और लेखन एक घोषणापत्र की तरह थे। उन्होंने कहा था कि उन्हें इस बात की चिंता नहीं थी कि आज़ादी आएगी या नहीं, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि आज़ादी जरूर आएगी, लेकिन उन्हें इस बात की चिंता थी कि आज़ादी के बाद देश पर शासन कौन करेगा।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “उनकी शहादत के 16 साल बाद देश आज़ाद हुआ। 1952 में जब पहली बार चुनाव हुए, तब भगत सिंह की उम्र लगभग 45 वर्ष होती। उन्हें देश का पहला प्रधानमंत्री होना चाहिए था। अगर भगत सिंह ने भारत का नेतृत्व किया होता, तो देश का पूरा नक्शा और भाग्य अलग होता।”

उन्होंने आगे कहा, “उन्होंने पहले ही कह दिया था कि आज़ादी के बाद सत्ता गलत हाथों में नहीं जानी चाहिए, लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा ही हुआ। 80 साल बाद भी हम उसी पुराने सिस्टम, उसी पटवारी-तहसील ढांचे में फंसे हुए हैं और लोग आज भी नौकरियों और सेवाओं जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जैसे महात्मा गांधी को बापू कहा जाता है, जवाहर लाल नेहरू को चाचा और चौधरी देवीलाल को ताऊ कहा जाता है, उसी तरह मैं खुद को लोगों का बेटा और भाई मानता हूं।” उन्होंने आगे कहा कि पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों ने देश को बहुत नुकसान पहुंचाया है। कांग्रेस ने अपने स्वार्थ के लिए संकीर्ण राजनीति की, जबकि अन्य पार्टियों ने वोट हासिल करने के लिए धर्म का सहारा लिया और इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ा।

नशों के बारे में उन्होंने कहा, “इन पार्टियों ने युवाओं की नसों में नशा भरकर पंजाब की पीढ़ियों को बर्बाद कर दिया। पंजाब की युवा पीढ़ी को तबाह करने वाले अब लोगों को गुमराह करने के लिए खोखले दावे कर रहे हैं, लेकिन पंजाबी उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे।” उन्होंने आगे कहा कि यह पैसा नहीं, बल्कि हमारे किए गए काम बोल रहे हैं, जिनकी बदौलत हमने लोगों के दिलों में जगह बनाई है।

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